KBC 18: ‘दबंग’ में सलमान का वो सीन और बदल गई जिंदगी! फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट झंडू कुमार ने सुनाई दास्तान
KBC 18: 'केबीसी 18' में पहुंचे कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट झंडू कुमार ने अपनी इंस्पायरिंग कहानी अमिताभ बच्चन को सुनाई. बताया कैसे सलमान खान की फिल्म 'दबंग' देखकर शुरू किया था बॉडीबिल्डिंग का सफर.
Kaun Banega Crorepati 18: सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के बहुचर्चित क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में जब कोई ऐसा इंसान कदम रखता है जिसने अपनी मजबूरियों को अपनी ताकत बना लिया हो, तो वो पल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाता है. लेकिन इस बार सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर बैठने के लिए कोई एक नहीं, बल्कि हाल ही में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तिरंगा लहराने वाले देश के चार-चार रियल हीरोज (लवलीना बोरगोहेन, अस्मिता डे, शर्मिला ढांढर और झंडू कुमार) मौजूद थे. शो के दौरान मेंस हैवीवेट पैरा-पावरलिफ्टिंग में पदक जीतने वाले झंडू कुमार ने जब अपनी जिंदगी के संघर्ष और बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से मिली प्रेरणा का किस्सा सुनाया, तो खुद बिग बी भी उनके जज्बे के कायल हो गए.
झंडू कुमार ने अपनी कहानी की शुरुआत करते हुए बताया कि जब वो महज पांच साल के थे, तभी उन्हें पोलियो हो गया था. शरीर में आई कमजोरी के बावजूद उन्होंने कभी खुद को लाचार नहीं समझा. झंडू ने अमिताभ बच्चन को बताया कि उन्हें बॉडीबिल्डिंग करने की प्रेरणा बॉलीवुड के ‘दबंग’ यानी सलमान खान से मिली. उन्होंने कहा, “सर, 2010 के आसपास सलमान खान की फिल्म ‘दबंग’ आई थी. उस फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में जब सलमान खान की शर्ट फटती है और उनकी बॉडी दिखती है, तब मेरे अंदर एक अलग ही जोश भर गया. मुझे लगा कि मुझे भी ऐसी ही बॉडी बनानी है, बाइसेप्स, ट्राइसेप्स और चेस्ट बनाना है. बस वहीं से मेरी जिम जाने की शुरुआत हुई.”
दोस्तों के साथ गए और जीत लिया गोल्ड
शुरुआत में झंडू को ये भी नहीं पता था कि दिव्यांगों के लिए ‘पैरा स्पोर्ट्स’ जैसा कोई खेल भी होता है. साल 2018 में बिहार शरीफ में जब डिस्ट्रिक्ट लेवल पर शॉटपुट और जेवलिन का इवेंट हुआ, तो वह अपने दोस्तों के साथ सिर्फ देखने गए थे. दोस्तों के कहने पर उन्होंने हिस्सा लिया और वहां सीधे गोल्ड मेडल जीत लिया. इसके बाद जब पटना में स्टेट लेवल गेम्स हुए, तो लोगों ने उनकी बेहतरीन फिजिक देखकर उन्हें पावरलिफ्टिंग करने की सलाह दी. जब फोन में उन्हें पावरलिफ्टिंग की वीडियो दिखाई गई, तो उन्हें लगा कि यह तो वही वजन है जो वो रोज जिम में उठाते हैं.
सासाराम से ग्लासगो तक का ऐतिहासिक सफर
इसके बाद झंडू कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने पहला पावरलिफ्टिंग मुकाबला सासाराम में खेला और 105 किलो वजन उठाया. शुरुआत में वो सामान्य (एबल-बॉडी) वर्ग में भी खेले, लेकिन 2022 में उन्होंने पैरा-पावरलिफ्टिंग में कदम रखा. कोलकाता नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रोंज मेडल जीता. झंडू बताते हैं कि जब उन्होंने पहली बार नेशनल में मेडल जीता, तो खुशी के मारे वह रात भर सो नहीं पाए थे. इसके बाद ‘खेलो इंडिया 2025’ में उन्होंने 206 किलो वजन उठाकर नया रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया. चीन में हुए इंटरनेशनल मुकाबले में ब्रोंज और फिर वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने के बाद उनका चयन ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए हुआ, जहां उन्होंने देश का तिरंगा लहराया
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सब्जी बेचने से मुंबई के फुटपाथ तक…
हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचना झंडू के लिए कतई आसान नहीं था. बिहार में वो परिवार का हाथ बंटाने के लिए फुटपाथ पर सब्जी तक बेचते थे.जब डाइट और जिम के खर्च पूरे नहीं हो पाए, तो नौकरी की तलाश में अपनी ट्राइसाइकिल लेकर मुंबई आ गए. मुंबई में जिस साड़ी कंपनी में काम की उम्मीद थी, वह बंद मिली. झंडू ने बताया, “मुंबई में पांच-छह दिन वड़ा पाव खाकर गुजारे और फुटपाथ पर सोए. ट्राइसाइकिल चलाते हुए एक दिन किसी ने मुझे 5 रुपये का नोट थमा दिया. उस पल ने अंदर से तोड़ दिया और मैंने वापस लौटने का फैसला किया. जेब में सिर्फ 30 रुपये बचे थे और दो दिन भूखे रहकर ट्रेन से बिहार वापस पहुंचा.” घर लौटकर उन्होंने फिर से सुबह सब्जी बेचना और शाम को जिम में पसीना बहाना शुरू कर दिया.आखिरकार उनकी यही अटूट लगन 2018 में रंग लाई. बिना हार माने आगे बढ़ने का उनका ये सफर जानकर सिर्फ अमिताभ बच्चन ही नहीं मंच पर मौजूद दर्शक भी भावुक नजर आए.
‘KBC 18’ में सजा चैंपियंस का मंच
आपको बता दें कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का 18वां सीजन 10 अगस्त से शुरू हो चुका है. शो के पहले हफ्ते में जहां बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान और उनके बेटे जुनैद खान जैसे खास मेहमान नजर आए थे, वहीं दूसरे हफ्ते में शो के मेकर्स ने देश का नाम रोशन करने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के असली चैंपियंस को हॉटसीट पर आमंत्रित किया. अमिताभ बच्चन के इस मंच पर सलमान खान के जबरा फैन झंडू कुमार की ये कहानी साबित करती है कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने की लगन हो, तो कोई भी शारीरिक कमजोरी उसके सपनों के आड़े नहीं आ सकती.




