जिन भारतीयों ने कनाडा को दो टुकड़ों में बंटने से बचाया, अब उन्हीं की अल्बर्टा में एंट्री बैन करने की तैयारी
अल्बर्टा को अलग करने की मांग को लेकर जनमत संग्रह कराया गया था. इस रेफरेंडम में भारतीय मूल के नागरिकों ने कनाडा के पक्ष में मतदान किया था, जिसके कारण अल्बर्टा को अलग देश बनाने की मंजूरी नहीं मिली.
कनाडा के 2 टुकड़ों में बांटने की मांग को लेकर हाल ही में अल्बर्टा में जनमत संग्रह कराया गया था. इस जनमत संग्रह में भारतीयों ने अहम भूमिका निभाई. भारतीय मूल के नागरिकों के विरोध के कारण ही कनाडा 2 टुकड़ों में बंटने से बच गया, लेकिन अब जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में भारतीयों की एंट्री बैन करने की तैयारी है.
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक कनाडा सरकार ने हाल ही में जनमत संग्रह के उस सवाल पर खास ध्यान दिया है, जिसमें आव्रजन को लेकर सवाल पूछे गए थे. इस सवाल के जवाब में अधिकांश अल्बर्टा निवासी का कहना है कि यहां पर बाहरी लोगों की एंट्री बैन की जाए.
भारतीय मूल के 32 हजार लोग रहते हैं
रिपोर्ट्स के मुताबिक अल्बर्टा में भारतीय मूल के करीब 32 हजार लोग रहते हैं. ये लोग हाल ही में आए प्रवासियों का लगभग 16 प्रतिशत थे. हालिया जनमत संग्रह के दौरान भारतीय मूल के नागरिकों ने कनाडा के पक्ष में मतदान किया, जिसके बाद अल्बर्टा को अलग करने की मांग कुंद हो गई. अल्बर्टा में एशियाई मूल के करीब 2 लाख लोग रहते हैं.
50 साल पहले तक अल्बर्टा में कनाडा के लोग रहना नहीं चाहते थे. इसकी एक बड़ी वजह यहां तापमान है. आम दिनों में भी अल्बर्टा का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है.
वहीं अब अल्बर्टा को अलग करने की मांग करने वाले लोगों ने इमिग्रेशन का मुद्दा उठाया है. इन लोगों का कहना है कि सरकार यहां प्रवासियों के आने पर रोक लगाए. साथ ही यहां के एजुकेशन और हेल्थ पर सिर्फ अल्बर्टा के मूल नागरिकों का अधिकार हो.
इन्हें बाहर ही रखने की मांग क्यों हो रही है?
अल्बर्टा सरकार के मुताबिक अस्थाई निवासी जो बाहर से आकर अल्बर्टा में रहते हैं, इस वक्त उनकी आबादी कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत है. इन निवासियों से टैक्स रेवेन्यू में लगभग 150 मिलियन डॉलर का फायदा होता है, लेकिन हेल्थ, एजुकेशन और दूसरी सोशल सर्विसेज पर राज्य को हर साल 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्च आता है.



